केविन ओ’लेरी ने टोरंटो के Consensus 2025 में साफ-साफ कहा कि पारंपरिक फॉरेक्स और पेमेंट कंपनियां स्टेबलकॉइन्स से घबराई हुई हैं।
“ये कंपनियां इंटरनेशनल ट्रांसफर से अरबों डॉलर कमाती हैं,” उन्होंने कहा। “लेकिन अगर रेगुलेटेड स्टेबलकॉइन आ जाए? वह तेज, सस्ता और पारदर्शी होगा — और यही उन्हें खलता है।”
उन्होंने मौजूदा फॉरेक्स सिस्टम को “पुराना, बेढंगा और अक्षम” बताया।
“अगर रेगुलेटर्स हरी झंडी दिखा दें, तो पूरा सिस्टम बदल जाएगा।”
अमेरिका ला रहा नया बिल
ओ’लेरी के मुताबिक, अमेरिकी संसद एक नया कानून “Genius Act” लाने वाली है जिससे स्टेबलकॉइन्स को कानूनी दर्जा मिलेगा।
“अगर SEC ने समर्थन कर दिया, तो स्विट्ज़रलैंड, ब्रिटेन और अबू धाबी जैसे देश भी इसे अपनाएंगे।”
लेकिन बैंक और पुरानी कंपनियां इससे डरी हुई हैं।
“वे लॉबिंग में करोड़ों डॉलर खर्च कर रहे हैं ताकि यह पास न हो।”
बड़ा बदलाव सामने?
सांसद किर्स्टन गिलिब्रैंड ने भी Coinbase के इवेंट में बताया कि उपभोक्ता सुरक्षा, दिवालियापन और एथिक्स से जुड़े नए नियम आने वाले हैं।
अब तक करीब 250 अरब डॉलर स्टेबलकॉइन्स में लॉक हैं। Tether का USDT करीब 150 अरब डॉलर का है, और Circle का USDC 60 अरब डॉलर से ज्यादा। ओ’लेरी का मानना है कि एक बार नियम तय हो जाएं, बड़े निवेशक तेजी से बाजार में उतरेंगे।
