कोरिया का केंद्रीय बैंक चाहता है कि बैंक धीरे-धीरे स्टेबलकॉइन शुरू करें।
डिप्टी गवर्नर रयू सांगदई ने कहा: शुरुआत उन बैंकों से हो जो सख्त नियमों में आते हैं।
क्यों? सुरक्षा के लिए।
स्टेबलकॉइन फायदेमंद हैं, पर खतरे भी हैं।
रयू ने चेतावनी दी कि इससे पूंजी तेजी से देश से बाहर जा सकती है।
उन्होंने “नैरो बैंकिंग” की बात भी की।
बावजूद इसके, बैंक खुद का डिजिटल करेंसी (CBDC) बना रहा है।
पहला टेस्ट 30 जून तक चलेगा। दूसरा चरण बैंक की सहमति पर निर्भर है।
368,000 डॉलर वाली कंपनियों को स्टेबलकॉइन जारी करने का प्रस्ताव है।
लेकिन बैंक की भूमिका जरूरी है।
कोरिया अकेला नहीं है।
वीजा, रूस और अबू धाबी भी स्टेबलकॉइन ला रहे हैं।
