अमेरिका के चार सबसे बड़े बैंक—JP मॉर्गन, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटीग्रुप और वेल्स फ़ार्गो—मिलकर एक डिजिटल स्टेबलकॉइन बना रहे हैं। इसका मकसद क्रिप्टो कंपनियों को टक्कर देना है।
पारंपरिक बैंक, आधुनिक तकनीक
ये बैंक पहले से ही Zelle और The Clearing House जैसे नेटवर्क चला रहे हैं। अब वे ब्लॉकचेन पर आधारित अपनी खुद की स्टेबलकॉइन लाना चाहते हैं।
लक्ष्य: तेज़ पेमेंट, कम लागत और क्रिप्टो सेक्टर की बराबरी करना।
चुनौती: अमेरिकी कानून
यह प्रोजेक्ट ‘GENIUS Act’ नामक कानून पर निर्भर है, जो सीनेट में विचाराधीन है। इसके पास होते ही बैंक और क्रिप्टो कंपनियां कानूनी रूप से स्टेबलकॉइन जारी कर सकेंगी।
GENIUS Act = अमेरिका में स्टेबलकॉइन के लिए स्पष्ट नियम बनाने वाला प्रस्तावित कानून।
अब तक क्या हुआ है?
JP मॉर्गन अपने JPM Coin का आंतरिक उपयोग कर रहा है। वेल्स फ़ार्गो ने अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए टेस्ट किया है। बैंक ऑफ अमेरिका ने अब तक कोई कॉइन नहीं लॉन्च किया है, लेकिन वह तैयार है।
क्रिप्टो कंपनियों की प्रतिक्रिया
Circle और Coinbase जैसी कंपनियां बैंकिंग लाइसेंस लेने की कोशिश कर रही हैं। कुछ फुल बैंक बनना चाहती हैं, तो कुछ सिर्फ स्टेबलकॉइन जारी करना चाहती हैं।
Trump से जुड़ा प्रोजेक्ट USD1, BitGo में अपनी होल्डिंग्स रखता है, और BitGo भी बैंकिंग लाइसेंस के लिए प्रयास कर रहा है।
इस समय सिर्फ Anchorage Digital के पास अमेरिकी फेडरल बैंकिंग लाइसेंस है।
