यूरोप अब इस बात पर बहस नहीं कर रहा कि क्रिप्टो को रेगुलेट किया जाए या नहीं। अब असली सवाल यह है कि नियंत्रण किसके हाथ में होगा। यूरोपीय आयोग बड़े क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स की निगरानी ESMA को सौंपना चाहता है, जो पेरिस में स्थित है।
फ्रांस, ऑस्ट्रिया और इटली इस कदम का समर्थन कर रहे हैं। उनका मानना है कि अलग-अलग देशों के नियमों में अंतर से खामियां पैदा होती हैं। कुछ कंपनियां ढीले नियमों वाले देशों का फायदा उठा सकती हैं। केंद्रीकृत निगरानी से इन समस्याओं को कम किया जा सकता है।
माल्टा इस योजना का विरोध करता है। उसका कहना है कि MiCA अभी नया है और बाजार अभी इसके अनुसार ढल रहा है। इस समय बदलाव करना अस्थिरता ला सकता है और कंपनियों को यूरोप से बाहर धकेल सकता है।
संरचनात्मक स्तर पर भी चिंता है। बड़ी कंपनियां एकीकृत सिस्टम की तरह काम करती हैं, लेकिन निगरानी का बंटवारा समन्वय को कमजोर कर सकता है। इससे जोखिम प्रबंधन पर असर पड़ सकता है और नवाचार धीमा हो सकता है।
